शनि और राहु केतु के बुरे प्रकोप से बचने के लिए धारण करें यह रत्न, जीवन में लाएगा खुशहाली

ज्योतिष शास्त्र हमारे जीवन में आने वाली विपदा, बाधाओं के लिए हमें कई सारे उपाय बताता है, ऐसे में हर व्यक्ति की अपनी एक अलग राशि होती है और हर राशि का प्रतिनिधित्व नौ ग्रहों में से कोई ना कोई करता ही है, लेकिन इन नौ ग्रहों का प्रभाव अलग-अलग तरह से हर व्यक्ति के ऊपर पड़ता है, जिसे इसकी ग्रह दशा कहा जाता है। ग्रह दशा आपके लिए अच्छी साबित भी हो सकती हो और बुरी साबित भी हो सकती है। ऐसे में कुछ ग्रह हम पर बुरा प्रभाव भी डालते हैं लेकिन आज हम बात करने जा रहे हैं शनि राहु और केतु के बारे में यह तीनों ग्रहों को बहुत कठोर बताया गया है, इनके प्रभाव से व्यक्ति बहुत ज्यादा प्रभावित होता है और बहुत से ग्रह दोष भी उत्पन्न होते हैं।

हर ग्रह दोष की शांति के लिए ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अलग-अलग तरह के रत्न पहनने की सलाह दी गई है। इन रत्नों का धारण करने से जिन ग्रहों का प्रभाव ज्यादा बुरा पड़ रहा है उन्हें शांत करने के लिए बहुत कारगर साबित होता है। ऐसे में कोई ग्रह यदि आपकी कुंडली में ग्रह दोष उत्पन्न कर रहा है आपको बुरा प्रभाव दे रहा है तो आपको अपने ज्योतिष से बात करनी चाहिए और उनसे अपने ग्रह को शांत करने के लिए रत्न पहनने की सलाह लेनी चाहिए। इसके बाद ही आपको उन रत्नों को धारण करना चाहिए शनि राहु और केतु ये तीनों के लिए एक रत्न बहुत खास है जिसे यदि हम धारण कर ले तो इन तीनों के अशुभ प्रभाव से बच सकते हैं इसलिए आज इस आर्टिकल में हम आपको ऐसे ही रत्नों के बारे में बताएंगे जिनसे आप शनि राहु और केतु के प्रकोप से बच सकते हैं।

इस रत्न को धारण करें
शनि, राहु और केतु तीनों बहुत गुरूर है, इनके बुरे प्रकोप से व्यक्ति के जीवन में बहुत से दुख, मुसीबतें और धन हानि होती है लेकिन यदि हम इन तीनों की पीड़ा से मुक्ति पाना चाहते हैं तो अलग-अलग रत्न धारण कर सकते हैं। रत्न शास्त्र के मुताबिक शनि के लिए नीलम, राहू के लिए गोमेद और केतु के लिए लहसुनिया धारण करने की सलाह दी जाती है, लेकिन शनि राहु और केतु इन तीनों से मुक्ति के लिए लाजवर्त एक ऐसा रत्न है जिसे यदि हम धारण कर सकते हैं तो यह हमें इन तीनों के बुरे प्रकोप से बचा सकता है।

जाने लाजवर्त पहनने के फायदे
यदि आपकी बार-बार दुर्घटना हो रही है तो आपको इससे बचने के लिए लाजवर्त रत्न को धारण करना चाहिए। यदि आपको बार-बार धन हानि हो रही है तो भी आपको इसे धारण करना चाहिए ज्योतिषशास्त्र के अनुसार राहु केतु के कारण पितृदोष भी उत्पन्न होता है और यह सबसे बड़ा दोष होता है इसकी वजह से हमें बहुत सी विप अदाओं का सामना करना पड़ता है इसलिए लाजवर्त धारण करने से पितृदोष को वो काफी हद तक शांत किया जा सकता है इसके अलावा यह आपको सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण के दोस्त से भी मुक्ति दिलाने में आपकी मदद करता है।

इस तरह धारण कर सकते हैं आप लाजवर्त
यदि आप लाजवर्त धारण करना चाहते हैं तो आप अंगूठी ब्रेसलेट या लॉकेट में बनवाकर भी इसे धारण कर सकते हैं लेकिन इसे धारण करते वक्त इस बात का ध्यान रखें कि शनिवार के दिन पंचधातु या स्टील की धातु में जड़वा कर इसे धारण करे। लाजवर्त धारण करने के लिए सूर्यास्त से 2 घंटे पहले का समय सबसे सर्वश्रेष्ठ होता है किसी भी शनिवार के दिन इस की प्राण प्रतिष्ठा करके शनी के किसी भी मंत्र को बोलते हुए इसे धारण करना चाहिए या आपको बहुत लाभ पहुंचाएगा।

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